भाविका अपने हाथों को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी , लेकिन उसके हाथ कोई रस्सी से नहीं बंधे थे , बल्कि बेल्ट से बांधे गए थे जो कि उस चेयर से कनेक्टेड थे ।
भाविका सर झुकाए इस कोशिश में परेशान थी कि तभी दरवाजा खुला । उसने तुरंत अपनी नजर उठाकर सामने देखा। सामने अंधेरा सा था , कोई नजर नहीं आ रहा था । वो इंसान धीरे धीरे भाविका की तरफ आने लगा । भाविका ने कसकर अपने हाथों की मुट्ठियां बना ली ।
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